शरद पूर्णिमा पर बनी खीर का औषधीय महत्व  (Sharad Purnima kheer benefits)

आश्विन माह की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा के नाम से जानते हैं। इस दिन चंद्रमा पृथ्वी के निकट होता है

शरद पूर्णिमा के मौके पर दूध, चावल और शक्कर मिलाकर खीर बनाई जाती है, ये खीर पूरी रात चांद की रोशनी में बाहर रखी जाती है

शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने से इसमें औषधीय गुण समाहित हो जाते हैं। इसका सेवन करने से स्वास्थ्य लाभ मिलता है

ऐसी मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात को खीर बनाकर खुले आकाश के नीचे रखने से उसमें चाँद की किरणों से अमृत बरसता है, और इस खीर को खाने से कई रोग दूर होते हैं

चंद्रमा से निकलने वाली तरंगों में मौजूद रासायनिक तत्व सीधे धरती पर आकर गिरते हैं. इसी कारण इस रात को चांद से निकलने वाली तरंगों से मिलने वाले पोषण तत्व मिल जाते हैं. जिसे दूसरे दिन खाली पेट खाने से शरीर में ऊर्जा प्रवाहित होती है

शरद पूर्णिमा की खीर में चांद की रोशनी ऐसे तत्व घोलती है, जो पेट से जुड़े कई रोगों से राहत देती है

चांद की किरणें इस दिन इतनी शीतल होती हैं कि उसका असर खीर की तासीर को भी ठंडा कर देता है, इसके सेवन से शरीर का पित्त कम होता है

एसिडिटी, स्किन रेशेज, पेट में जलन, आर्टिकेरिया (Urticaria) शीतपित्त या पित्ती जैसी बीमारियों में इस खीर से राहत मिलती है

आंख का कोई इंफेक्शन होने पर शरद पूर्णिमा के चांद को देखें, चांद की किरणों से आंखों को ठंडक मिलती है और रोग का प्रभाव कम होता है

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